बड़ी साजिश – बड़ी सफलता ! रतलाम से कंबोडिया और कनाडा तक जुड़े साइबर धोखाधड़ी के तार, 28 दिन डिजिटल अरेस्ट रख रिटायर्ड प्रोफेसर से ठगे 1.34 करोड़ रुपए
रतलाम पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर एक रिटायर्ड प्रोफेसर से 1.34 करोड़ रुपए की ठगी का पर्दाफाश किया है। मामले के तार देश के अनेक राज्यों के साथ ही कनाडा और कंबोडिया जैसे देशों से भी जुड़े हैं।
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर फ्रॉड का बड़ा मामला रतलाम में सामने आया है। ठगों ने एक रिटायर्ड प्रोफेसर और उनकी पत्नी को मुंबई क्राइम ब्रांच और न्यायालय का डर दिखाकर 28 दिन तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर न सिर्फ मानसिक रूप से प्रताड़ित किया बल्कि उनसे 1 करोड़ 34 लाख 50 हजार रुपए भी ठग लिए। यह राशि देश के चार राज्यों में स्थित बैंक खातों से होते हुई क्रिप्टो करेंसी नेटवर्क के माध्यम से ठगी गई। मामले के तार कंबोडिया और कनाडा से भी जुड़े हैं। रतलाम पुलिस को इस साजिश का पर्दाफाश करने में बड़ी सफलता मिली है।

मामले का खुलासा एसपी अमित कुमार ने मंगलवार को पत्रकार वार्ता में किया। एसपी ने बताया कि 15 नवंबर 2025 को फरियादी रिटायर्ड प्रोफेसर के मोबाइल फोन पर एक कॉल आई। कॉलर ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। पहले तो उसने प्रोफेशनल और कानूनी शब्दावली का उपयोग किया ताकि उन पर किसी प्रकार का शक न हो। उसने कहा कि आपके नाम से जारी सिम का उपयोग बड़े साइबर फ्रॉड में हुआ है। मुंबई के केनरा बैंक में 247 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है। बैंक खाते में उनके आधार और केवाईसी दस्तावेज भी लगे हैं।
ऐसा डर कि, हर बात मानने लगे
कॉलर की बात सुनते ही रिटायर्ड प्रोफेसर चौंक गए। उन्होंने कहा कि ऐसे किसी भी मामले से उनाक कोई संबंध नहीं और न ही इसकी जानकारी है। इस पर कॉलर ने द्वारा उन्हें गिरफ्तारी वारंट जारी होने, सीबीआई जांच और जेल भेजने जैसी धमकियां दी गईं। इससे रिटायर्ड प्रोफेसर डर गए जिसका फायदा उठा कर कॉल करने वालों ने बातों-बातों में उनसे उनके सारे अकाउंट्स, कनाडा में नौकरी करने वाले बेटे की जानकारी भी ले ली। इस बीच वे लगातार धमकाते रहे कि उनकी हर काल, हर मैसेज टेप हो रहा है। अगर उन्होंने किसी को कुछ भी बताया तो उनके बेटे को गोली मार दी जाएगी और वह कभी लौट नहीं पाएगा। नतीजतन रिटायर्ड प्रोफेसर आरोपियों की हर बात मानने लगे। आरोपियों ने उन्हें व्हाट्सएप कॉल कर उनके मोबाइल फोन पर एक APK फाइल (ऐप) भी इंस्टॉल करवा लिया।
नकली कोर्ट, नकली गवाह, 28 दिन अरेस्ट
एसबी ने बताया कि ठगों ने रिटायर्ड प्रोफेसर को वीडियो काल कर नकली कोर्ट रूम, जज, वकील और गवाहों जैसे अनेक दश्य भी दिखाए। उनसे हर बार यह कहा गया कि यदि उन्होंने कुछ भी किया तो काल डिस्कनेक्ट होते ही पुलिस ने उनके घर पहुंच जाएगी। इतना ही नहीं उनके बेटे को इंटरपोल के जरिए गिरफ्तार कर मार दिया जाएगा। इस तरह आरोपियों ने रिटायर्ड प्रोफेसर को 15 नवंबर से 12 दिसंबर (28 दिन) तक डिजिटल अरेस्ट होने का डर दिखाकर उन्हें ठगते रहे। आरोपियों ने इस दौरान फरियादी के बैंक खातों से 1 करोड़ 34 लाख 50 हजार रुपए ऐंठ लिया।
ऐसे खुली साइबर फ्रॉड की पोल
एसपी अमित कुमार के अनुसार आरोपियों द्वारा जब भी रिटायर्ड प्रोफेसर से रुपए ऐंठे जाते तो बैंक खाते से रुपए ट्रांसफर होने की जानकारी उनके कनाडा निवासी बेटे को भी मिल जाती। इससे बेटे ने कई बार माता-पिता से पूछा लेकिन उन्होंने डर के कारण कुछ नहीं बताया। इससे बेटा रतलाम आया तो साइबर फ्रॉड का अंदेशा हुआ। उसने बिना समय गंवाए रात को ही ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करवा दी।
4 राज्यों से आरोपी गिरफ्तार
एसपी ने बताया कि एफआईआर दर्ज होते ही रतलाम पुलिस हरकत में आई और त्वरित कार्रवाई शुरू की गई। एएसपी राकेश खाखा और विवेक कुमार लाल के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया। जांच के दौरान परतें खुलती गईं और अब तक 11 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। सबसे पहले जबलपुर के अशोक पिता राधेश्याम जायसवाल (61), सनी पिता सोनू (34), सांराश उर्फ सोनू पिता योगेंद्र तिवारी (18) तथा एक नाबालिग आरोपी तक पंहुचे और उन्हें हिरासत में लिया। नीमच से पवन पिता कैलाश कुमावत (23) को पकड़ा। वहीं गोरखपुर से अमरेंद्र कुमार मौर्य (34), जामनगर (गुजरात) से आरिफ, हमीद, शाहिद कुरैशी और सादिक हसन को गिरफ्तार किया। दो आरोपी बिहार से भी पकड़े गए हैं। अभी आसम, कश्मीर, मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों के कुछ अन्य आरोपियों की भी तलाश जारी है। उन्हें भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
ऐसे देते हैं ठगी को अंजाम
एसपी ने बताया कि आरोपियों द्वारा चार अलग-अलग टीमों के रूप में काम करते हैं। कुछ ठग टेलीग्राम और वाट्सएप पर फर्जी सिम, फर्जी नाम से खाता बनाकर फ्लैश करते हैं। इन सोशल मीडिया एकाउंट्स को अन्य आरोपी खरीदते हैं और फिर इन्हीं के माध्यम से लोगों को जोड़ कर APK फाइल डाउनलोड करवा कर रुपए ऐंठते हैं। ऐंठी गई राशि गुजरात के सूरत में आनगड़िया के माध्यम से क्रिप्टो करेंसी के रूप में कंबोडिया पहुंचती है। रिटायर्ड प्रोफेसर को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर इसी प्रकार राशि ऐंठी गई।
एक आरोपी का NGO, दूसरे ने बना डाली नकली कोर्ट
एसपी के अनुसार पकड़े गए बिहार के आरोपियों ने आसम ने नकली कोर्ट रूम का पूरा सेटअप बना रखा है। वहीं गोरखपुर से गिरफ्तार अमरेंद्र कुमार का आईटच नाम से NGO है। इसके खाते में 2 करोड़ रुपए से ज्यादा पाए गए। रिटायर्ड प्रोफेसर को डराकर 50 लाख रुपए अमरेंद्र के खाते में ही ट्रांसफर करवाए गए थे। वहीं जबलपुर के आरोपियों और नीमच के आरोपियों के खातों में 14-14 लाख रुपए मिले। इन सभी खातों की राशि का उपयोग गुजरात के आरोपियों ने किया और उससे क्रिप्टो करेंसी खरीदी। अब तक 11.40 लाख रुपये फ्रीज कराए जा चुके हैं। शेष राशि आरोपियों द्वारा निकाली जा चुका ही। कश्मीर निवासी आरोपी एक लड़की के कहने पर काम करता है।
केंद्रीय एजेंसियां सतर्क, जारी रहेगी जांच
एसपी ने बताया कि इस साइबर ठगी के तार अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जुड़े हैं। इससे केंद्रीय जांच एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं। इसमें रतलाम पुलिस द्वारा जांच में समन्वय किया जाएगा। आशंका है कि इन आरोपियों द्वार अन्य लोगों को भी शिकार बनाया गया होगा। इसलिए जांच आगे भी जारी रहेगी।
आप भी रहें सावधान !
एसपी ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी तरह के भ्रामक फोन काल आने पर डरें नहीं। यदि ऐसा कोई काल आता है तो वे तत्काल अपने परिजन और पुलिस को को सूचित करें। एसपी के अनुसार कोई भी पुलिस, फोर्स कभी किसी को इस तरह फोन पर / डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है। यदि कोई ऐसा कहता है तो स्पष्ट है कि वह ठगों की साजिश है।
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