अहम् फैसला ! फर्जी मृत्यु प्रमाण-पत्र और शपथ-पत्र पेश कर नकली बेटी ने बेच दिया मकान, न्यायालय ने सुनाई 65 वर्षीय वृद्धा को विभिन्न धाराओं में 2 से 7 साल तक की सजा
फर्जी शपथ-पत्र और मृत्यु प्रमाण-पत्र के आधार पर मकान बेचने के मामले में एक वृद्धा को न्यायालय ने अलग-अलग धाराओं में 2 से 7 वर्ष तक की सजा सुनाई है।
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव ने 65 वर्षीय वृद्धा को फर्जी नामांतरण करवाकर मकान की फर्जी रजिस्ट्री करवाने के मामले में अलग-अलग धाराओं में 2 से सात वर्ष तक की सजा सुनाई है। अभियुक्त ने फर्जी मृत्यु प्रमाण-पत्र और फर्जी शपथ-पत्र के आधार पर अपराध को अंजाम दिया था।
अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता समरथ पाटीदार ने बताया कि दिनांक 27.01.2016 को फरियादी राजशेखर पिता घनश्याम पुरोहित निवासी चित्तौड़गढ़ ने थाना दीनदयाल नगर रतलाम पर उपस्थित एक लिखित आवेदन दिया था। इसमें उन्होंने मप्र हाउसिंग बोर्ड के तत्कालीन कार्यपालन यंत्री डी. के. बाथम, सम्पत्ति अधिकारी पवन धबाड़े, कर्मचारी नानालाल बामनिया व मनोहरलाल शर्मा, दलाल रमेश शर्मा, पप्पू शर्मा, अशोक दय्या और लालीबाई (फर्जी महिला) एवं अन्य के विरुद्ध FIR दर्ज करने का आग्रह किया था। उन्होंने पुलिस को बताया था कि दीनदयाल नगर (अमृत सागर) रतलाम में स्थित म.न. डी-232 वर्ष 1992-93 में उनकी नानी कमलाबाई पति मोतीलाल उपाध्याय के नाम से हाउसिंग बोर्ड रतलाम से खरीदा था। वर्ष 2006 में नानी कमलाबाई उपाध्याय की मृत्यु होने के बाद उस मकान पर राजशेखर की मां रतनबाई पुरोहित का कब्जा था।
मृतका को अपनी मां बताकर बेच दिया था मकान
राजशेखर ने बताया था कि अशोक दय्या, रमेश शर्मा व हाउसिंग बोर्ड के कर्मचारियों ने मिलकर दिनांक 11.04.15 को लालीबाई निवासी मिल्लत नगर (फर्जी महिला व फर्जी पता) रतलाम ने कमला बाई को अपनी माँ बताकर शपथ-पत्र और मृत्यु प्रमाण-पत्र पेश किया। इसके आधार पर आरोपियों ने उक्त मकान धोखाधड़ी कर लालीबाई के नाम करवा लिया। बाद में उक्त मकान को दिनांक 10.09.15 को लालीबाई ने कमलेश पिता कैलाश पाटीदार ग्राम मांगरोल को 6 लाख 11 हजार रुपए में बेच दिया था। राजशेखर ने शिकायत के साथ मकान के मालिकी संबंधित दस्तावेज भी पुलिस को दिए थे। पुलिस ने लालीबाई, हाउसिंग बोर्ड के कर्मचारियों, दलाल के विरुद्ध थाना डीडी नगर में FIR दर्ज कर जांच की।
हर चीज फर्जी फिर भी हो गया नामांतरण, बिक गया मकान
जांच में पाया गया कि कमलाबाई के फर्जी मृत्यु प्रमाण-पत्र में लालीबाई को उसकी पुत्री बताया गया। मृत्यु प्रमाण-पत्र में जो जो मकान नंबर दर्ज था उस पर जमीलउद्दीन पिता कमरुद्दीन निवासी मिल्लतनगर का नाम दर्ज था दर्ज था। फर्जी मृत्यु प्रमाण-पत्र के आधार पर ही फर्जी नामांतरण आवेदन हाउसिंग बोर्ड कार्यालय में प्रस्तुत किया गया। इसमें लालीबाई के सभी पते फर्जी लिखे थे। फोटो भी फर्जी लगा था। नामांतरण में लगाया गया वोटर आईडी का मिलान निर्वाचन कार्यालय में कराने पर वह भी फर्जी पाया गया। दस्तावेजों में लालीबाई पति रामजी राठौर (तेली) नाम दर्ज था व सभी पते भी फर्जी थे। इतना ही नहीं नामांतरण में गवाह भी फर्जी थे। इसके बावजूद लालीबाई के नाम पर मकान का फर्जी नामांतरण भी हाउसिंग बोर्ड से हो गया। नामांतरण के दो महीने के बाद लालीबाई ने मकान कमलेश पाटीदार को बेच दिया था, जबकि हाउसिंग बोर्ड के नियमानुसार नामांतरण के एक वर्ष तक मकान का विक्रय नहीं किया जा सकता।
निर्णय के वक्त उपस्थित नहीं हुई आरोपी महिला
पुलिस ने जांच पूर कर अभियोग-पत्र न्यायालय में पेश किया। यहां सुनवाई की दौरान फरियादी राजशेखर व उसकी माता कमलाबाई ने दिनांक 23.07.2024 को न्यायालय में लिखित समझौता लालीबाई के पक्ष में पेस कर दिया था। इसके बाद न्यायालय ने आरोपी दलाल अशोक दय्या, रमेश शर्मा, हाउसिंग बोर्ड के कर्मचारी नानालाल व गोपाल को दोषमुक्त कर दिया था। लालीबाई इस मामले में 6 माह जेल में रही थी और अभी जमानत पर थी। उक्त प्रकरण में निर्णय आने के समय लालीबाई न्यायालय में उपस्थित नहीं हुई जिससे उसका सजा वारंट जारी हो गया। मामले में न्यायालय ने आरोपी लालीबाई पति रामाजी (65) निवासी संदला को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 419 में 3 वर्ष, धारा 467 व धारा 468 में 7-7 वर्ष व धारा 471 में 2 वर्ष की सजा सुनाई।
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