उजले कपड़े – काली करतूत ! धोखेबाज कॉलोनाइजर मनीष सुराना ने गोल्ड कॉम्पलेक्स की जमीन का कर दिया 62 करोड़ में सौदा, सराफा व्यवसायी से 35 लाख ठगे, FIR दर्ज

रतलाम में पुलिस ने एक कॉलोनाइजर के विरुद्ध धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। आरोप है कि कॉलोनाइजर ने निर्माणाधीन गोल्ड कॉम्प्लेक्स की जमीन बेचने के नाम पर सराफा व्यापारी से 35 लाख रुपए ठग लिए।

उजले कपड़े – काली करतूत ! धोखेबाज कॉलोनाइजर मनीष सुराना ने गोल्ड कॉम्पलेक्स की जमीन का कर दिया 62 करोड़ में सौदा, सराफा व्यवसायी से 35 लाख ठगे, FIR दर्ज
धोखेबाज कॉलोनाइजर मनीष सुराना की करतूत।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । आदतन अपराधी बन चुके धोखेबाज कॉलोनाइजर मनीष सुराना की एक और करतूत सामने आई है। आरोपी सुराना के विरुद्ध एक सराफा व्यापारी ने 35 लाख रुपए की ठगी की शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि कॉलोनाइजर ने नगर निगम के सामने निर्माणाधीन गोल्ड कॉम्प्लेक्स की जमीन बेचने के नाम पर ठगी की।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार इंदौर के सिलीकॉन सिटी के निवासी देवेन्द्र पिता स्व. राजेन्द्रकुमार सोनी ने एक लिखित शिकायत की है। इसमें सोनी ने पुलिस को बताया कि वे मूलतः रतलाम जिले के निवासी हैं और इंदौर में श्री ज्वैलर्स के नाम से सोने-चांदी का व्यवसाय करते हैं। सोनी के अनुसार उनके परिचित कॉलोनाइजर मनीष सुराना जमीनों की दलाली करते हैं। सराफा व्यवसायी का आरोप है कि फरवरी 2024 में मनीष सुराना उनके इंदौर स्थित निवास पर आया था। इस दौरान उसने रतलाम शहर की गोल्ड कॉम्पलेक्स स्थित जमीन का सौदा कराने की बात कही।

फर्जी पॉवर ऑफ अटार्नी दिखाकर जीता भरोसा

शिकायतकर्ता के अनुसार सुराना ने मुलाकात के दौरान दो मुख्त्यारनामा आम (पॉवर ऑफ आटर्नी) दिखाए गए। इनमें से पक्ष क्र. 01 में मुख्त्यारकर्ता मेहरून्निसा पिता अब्दुल गफ्फार खान निवासी छोटी सरवन बांसवाड़ा (राजस्थान) आदि का नाम उल्लेखित था। वहीं पक्ष क्र. 02 में मुख्त्यारग्रहिता के रूप में आरोपी मनीष सुराना का नाम दर्ज था। इसी तरह दूसरे मुख्त्यारनामा में पक्ष क्र. 01 में नासिर पिता सलीम खान निवासी बाई जी का वास रतलाम का नाम था और पक्ष क्र. 02 मुख्त्यारग्रहिता के रूप में मनीष सुराना का नाम था। दोनों में विक्रय की जाने वाली भूमि सर्वे कं. 105 (रकबा 0.20 हेक्टेयर) एवं सर्वे नं. 106 (रकबा 12 बिस्वा) सहित कुल रकबा 12 बीघा 06 बिस्वा कस्बा रतलाम में स्थित होना उल्लेखित था। दोनों मुख्तयारनामे पर पक्ष क्र. 01 व पक्ष क्रं. 02 के हस्ताक्षर भी थे।

पॉवर ऑफ अटार्नी में नहीं लगे थे ई-स्टाम्प

दोनों ही पॉवर ऑफ अटार्नी में ई-स्टाम्प 1000 रुपए की ई-स्टाम्प संलग्न होने का भी उल्लेख था परंतु ई-स्टाम्प नहीं लगे थे। इससे देवेंद्र ने इस बारे में सवाल किया तो आरोपी मनीष ने कहा कि ई-स्टाम्प नासिर खान के पास हैं और वह बाहर गया हुआ है। उसके लौटने पर ई-स्टाम्प मिल जाएंगे।

न्यायालय में वाद होने की बात भी कही

मनीष ने देवेंद्र को यह भी बताया था कि उक्त जमीन को लेकर न्यायालय में दीवानी वाद RCSA 188/2023 प्रचलित है। जब देवेंद्र ने इस वादे के बारे में सवाल किया तो उसने बताया कि उक्त भूमि पर समदड़ाया ब्रदर्स द्वारा नगर निगम की ओर से गोल्ड कॉम्पलेक्स बनाया जा रहा है जबकि उक्त संपूर्ण जमीन दोनों आम-मुख्त्यारों में उल्लेखित मुख्त्यारकर्ताओं की पैतृक संपत्ति है। इसके संबंध में ही उक्त दीवानी वाद न्यायालय में लगाया है। यह जल्द ही निराकरण होकर, फैसला आम-मुख्यारकर्ताओं के पक्ष में आने की पूर्ण संभावना है। यदि किसी कारणवश फैसला आम-मुख्यारकर्ताओं के पक्ष में नहीं आता है तो सौदा करने वाले द्वारा दी गई बयाने की राशि बिना ब्याज के लौटा दी जाएगी।

62 करोड़ में तह हुआ सौदा

फरियादी सराफा व्यवसायी के अनुसार आरोपी सुराना द्वारा उक्त जमीन की कीमत 70 करोड़ रुपए और बयाने की राशि 50 लाख रुपए देने की बात कही थी। इसे लेकर काफी मोलभाव हुआ और बात 62 करोड़ रुपए तथा बयाना राशि 35 लाख रुपए देने पर तय हुई। इसके चार दिन बाद ही सुराना इंदौर पहुंचा और एक टाइप की हुई सौदा चिट्ठी दिखाई। तब तक देवेंद्र ने अपने परिचित नरेन्द्र पटेल एवं कमलेश पंथी को भी बुलवा लिया। इस पर बयाने के तौर पर 35 लाख रुपए प्राप्त होने की जानकारी दर्ज थी। इस आधार पर फरियादी देवेंद्र ने आरोपी मनीष को 35 लाख रुपए का भुगतान कर दिया। भुगतान दो गवाहों

ई-स्टाम्प नहीं देने से हुआ संदेह

देवेंद्र सोनी ने पुलिस को बताया कि बयाना राशि देने के कई दिन बाद भी उन्हें ई-स्टम्प नहीं मिले तो उन्होंने सुराना से कहा लेकिन वह टालमटोल करने लगा जिससे उन्हें शंकाहुई। देवेंद्र रतलाम पहुंचे और नासिर खान से मिले। नासिर ने उन्हें बताया कि उनके द्वारा किसी प्रकार का कोई आम-मुख्यार नहीं लिखा गया है, किंतु मुझे मनीष सुराना ने सौदे के संबंध में 05 लाख रुपए दिए हैं, 30 लाख रूपए उसी के पास हैं। देवेंद्र ने मनीष से संपर्क किया तो वह कहने लगा कि आपके रुपए सुरक्षित हैं, आप 50 लाख रुपए की और व्यवस्था कर लो, मैं आगे की लिखा-पढ़ी भी करवा देता हूं। इस पर देवेंद्र ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं हुई थी, जब न्यायालय से निराकरण होगा उसके बाद ही रुपए दूंगा। उन्होंने यह भी कहा कि तुमने धोखाधड़ी की है, कूटरचित आम-मुख्यार देकर झूठ बोला है, यदि रुपए वापस नहीं किए तो पुलिस में शिकायत करूंगा। तब मनीष ने कहा कि अभी मेरे पास 08 लाख रुपए हैं, तुम थोड़ा रुको, बाकि रुपयों की व्यवस्था करता हूं। इसके बाद आरोपी ने फोन रिसीव करना ही बंद कर दिया।

अवैध कॉलोनी निर्माण का भी है केस

कॉलोनाइजर मनीष सुराना के विरुद्ध स्टेशन रोड थाने पर अवैध कॉलोनी निर्माण का केस भी दर्ज है। रतलाम ग्रामीण तहसील के राजस्व निरीक्षक करमचंद (54) पिता रकमा डोडियार ने थाने में आवेदन दिया था। इसमें बताया गया था कि कलेक्टर कॉलोनी सेल से मिले पत्र के अनुसार ग्राम बड़ोदिया के हल्का नंबर 56 स्थित सर्वे नंबर 302/3 रकबा 0.200 हेक्टेयर व सर्वे नंबर 302/4/1 रकबा 0.160 हेक्टेयर पर भूमि स्वामी मनीष सुराना ने दुकानों का निर्माण किया है। यह लैंड डाइवर्जन ऑर्डर के बिना दुकान निर्माण कर संचालन करना, रोड व भवन निर्माण तथा प्लॉट बेचना सहित अवैध कॉलोनी निर्माण के काम को प्रमाणित करता है। मामले में सुराना के खिलाफ मप्र पंचायती राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 61-घ (2) व (3) में केस दर्ज किया गया था। सुराना के विरुद्ध पहले भी कई मामले दर्ज हो चुके हैं।