दो दिवसीय गुरु सप्तमी महापर्व 16 जनवरी से मनेगा, धार्मिक अनुष्ठान सहित विभिन्न आयोजन होंगे, नवयुवक परिषद की बैठक में हुए निर्णय

श्रीमद् राजेंद्र सूरीश्वर जी महाराज की 197वीं जन्म जयंती और 117वीं स्वर्गरोहण तिथि पर 17 जनवरी को विभिन्न कार्यक्रम होंगे।

दो दिवसीय गुरु सप्तमी महापर्व 16 जनवरी से मनेगा, धार्मिक अनुष्ठान सहित विभिन्न आयोजन होंगे, नवयुवक परिषद की बैठक में हुए निर्णय
श्रीमद् राजेंद्र सूरीश्वरजी महाराज।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । कलिकाल कल्पतरु, अभिधान राजेंद्र कोष के रचयिता श्रीमद् राजेंद्र सूरीश्वर जी महाराज की 197वीं जन्म जयंती और 117वीं स्वर्गरोहण तिथि 17 जनवरी को धूमधाम से मनाई जएगी। इस मौके पर नगर में दो दिवसीय गुरु सप्तमी महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान भी होंगे।

यह जानकारी अखिल भारतीय श्री राजेंद्र जैन नवयुवक परिषद के अध्यक्ष एवं पार्षद धर्मेंद्र रांका तथा सचिव कमलेश भंडारी ने दी। पदाधिकारीद्वय ने बताया कि 17 जनवरी को लोक संत पुण्य सम्राट श्रीमद् विजयजयंत सेन सुरीश्वर जी म. सा. के पटधर गच्छाधिपति धर्म दिवाकर श्रीमद् नित्यसेन सूरीश्वर जी म. सा. एवं वर्तमान आचार्य श्रीमद जयरन सूरीश्वर जी महाराज साहब की पावन प्रेरणा से कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके तहत गौसेवा, धार्मिक, पूजन, पाठ आदि आयोजन किए जाएंगे। कार्यक्रमों का आयोजन अखिल भारतीय श्री राजेंद्र जैन नवयुवक परिषद, महिला, तरुण, बहू एवं बालिका परिषद द्वारा किए जाएंगे।

बैठक में बनी आयोजन की रूपरेखा

इसकी तैयारियों को लेकर परिषद परिवार की बैठक आयोजित की गई। बैठक में लिए गए निर्णय के मुताबिक गुरु सप्तमी महोत्सव के पहले दिन 16 जनवरी को सुबह 8 बजे से त्रिवेणी गौशाला में गौसेवा की जाएगी। सुबह 10 बजे नीमवाला उपाश्रय में सामूहिक सामायिक एवं गुरुदेव के मंत्र का जाप होगा। दूसरे दिन 17 जनवरी को गुरु सप्तमी को सुबह 9 बजे नीमवाला उपाश्रय में श्री राजेंद्रसूरि अष्टप्रकारी पूजन होगा। इसके पश्चात भव्य चल समारोह (वरघोड़ा) नगर के प्रमुख मार्गों से होकर निकलेगा और लक्कड़पीठा में समापन होगा। इसके बाद सभी समाजजन जयंतसेन धाम जाएंगे जहां गुरुदेव की आरती और स्वामी वात्सल्य होगा। रात में 108 दीपक से गुरुदेव की आरती नीमवाला उपाश्रय में उतारी जाएगी।

196 वर्ष पूर्व राजस्थान के भरतपुर में हुआ था जन्म

पार्षद रांका ने बताया कि गुरुदेव का जन्म 196 वर्ष पूर्व राजस्थान के भरतपुर में हुआ था। पूज्य गुरुदेव कि समाधि स्थल मोहनखेड़ा में है जहां गुरु सप्तमी पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। गुरुदेव का रतलाम से भी गहरा संबंध रहा है। उन्होंने रतलाम के नीमवाला उपाश्रय पर पांच चातुर्मास किए थे। इस दौरान उन्होंने श्री अभिधान राजेंद्रकोष का अधिकतर लेखन भी किया था। यहीं यह ग्रंथ प्रकाशित भी हुआ था।