सनातनी हुंकार ! अगरजी का मंदिर जैन समाज का नहीं, समाज सनातनियों की सहिष्णुता को कमजोरी ना समझे, सद्भावना खंडित करना ठीक नहीं- अनिल झालानी

रतलाम में श्री अगर जी का मंदिर में हुए धार्मिक आयोजन को लेकर जैन द्वारा जताई गई आपत्ति से सनातन समाज में तीखी प्रतिक्रिया है। इसे लेकर श्री सनातन धर्मसभा एवं श्री महारूद्र यज्ञ समिति ने नाराजगी जताई है।

सनातनी हुंकार ! अगरजी का मंदिर जैन समाज का नहीं, समाज सनातनियों की सहिष्णुता को कमजोरी ना समझे, सद्भावना खंडित करना ठीक नहीं- अनिल झालानी
पत्रकार वार्ता के दौरान जानकारी देते श्री सनातन धर्मसभा एवं महारूद्र यज्ञ समिति के पदाधिकारी।

एसीएन टाइम्स @ रतलाम । अगरजी का मंदिर नाम से ख्यात श्री चौमुखा महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि पर हुए आयोजन के बाद उपजे विवाद को लेकर श्री सनातन धर्मसभा एवं श्री महारुद्र यज्ञ समिति ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। धर्मसभा एवं समिति अध्यक्ष अनिल झालानी ने साफ कहा है कि न्यायालय के आदेश के अनुसार यह मंदिर जैन समाज का नहीं है। यह ऐतिहासिक महत्व का होकर पूरे सनातन समाज की आस्था का केंद्र है। अतः जैन समाज सनातन समाज की सहिष्णुता को कमजोरी ना समझे। हम बड़े दिलवाले हैं, संकीर्ण नहीं। इस तरह दो शांतिप्रिय समाजों में सद्भावना खंडित करना अच्छा नहीं।

श्री सनातन धर्मसभा एवं श्री महारुद्र यज्ञ समिति अध्यक्ष झालानी रविवार को श्री सज्जन क्षत्रिय ब्राह्मण छात्रावास में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विगत दिनों जैन समाज द्वारा तथ्यों को तोड़-मरोड़कर तथा भड़काऊ भाषा का उपयोग कर एक सामान्य घटना की एक मनगढ़त कहानी बनाकर शांतिप्रिय समाजों में अनावश्यक खाई पैदा करने की दुर्भावना से प्रशासन को ज्ञापन देकर शहरवासियों में भ्रान्ति उत्पन्न की गई। उस संदर्भ में ही सनातन समाज द्वारा रतलाम नगर के नागरिकों के समक्ष स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं।

प्रसादी को ‘अभक्ष्य’ बताना निंदनीय

अध्यक्ष ने बताया कि बागड़ों का वास स्थित श्री चैमुखा महादेव मंदिर पर प्रतिवर्ष अनुसार महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर अभिषेक, पूजन, आरती के पश्चात परम्परानुरूप प्रसादी वितरण किया गया। प्रसादी के लिए कुछ विघ्नसंतोषियों द्वारा ‘अभक्ष्य’ शब्द का उपयोग किया गया, वह सरासर गलत एवं निंदनीय है। भोलेनाथ की प्रसादी थी जिसमें कलाकंद एवं आलू की चिप्स का उपयोग हुआ। यह उपवास में भी फरियाली के रूप में उपयोग करते हैं। छप्पन भोग में भी आलू का प्रयोग शास्त्र अनुसार होता है। मंदिर मे स्थापित जैन देवी-देवता की तरफ प्रसादी नहीं बांटी गई तथा पूर्ण अनुशासन के साथ उस तरफ न तो कोई गया और न ही किसी मूर्ति आदि से छेड़छाड़ ही की गई। यह मौके पर उपस्थित प्रशासनिक अधिकारियों ने स्वयं देखा। आयोजकों ने चैमुखा महादेव जो हमारे आदि देव हैं, उस तरफ ही प्रसादी बांटी।

महादेव के आयोजन के खिलाफ ज्ञापन देना दुर्भाग्यपूर्ण

धर्मसभा और समिति पदाधिकारियों ने जैन समाज के प्रबुद्धजन से निवेदन किया है कि आप सनातन धर्म के ही अंग हैं, आपकी पूजा प्रणाली भिन्न हो सकती है। हम सनातनधर्मी विश्व कल्याण की कामना करते हैं। हम वासुधैव कुटुंबकम की अवधारणा और सर्वे भवंतु सुखिनः सिद्धांत वाले हैं। हमारी सोच संकीर्ण नहीं है। हमारे देवस्थान न्यास जैसे श्री गढ़ कैलाश मंदिर आदि मंदिरों में अशोक चैटाला, अमित कटारिया आदि संरक्षक व ट्रस्टी हैं जो कि जैन हैं। फिर भी वे महादेव के आयोजन के खिलाफ ज्ञापन देने प्रशासन के पास गए जो दुर्भाग्य का विषय है। यही लोग हर साल श्री गढ़ कैलाश मंदिर में आलू की चिप्स और साबूदाना-आलू की खिचड़ी प्रसाद में भी बाटते हैं। अतः इन लोगों को स्पष्ट करना चाहिए कि यहां चैमुखा महादेव में उन्हें क्या आपत्ति है। झालानी सहित पदाधिकारियों ने कहा कि इस मामले में वास्तविकता यह है कि एक दिन पहले ट्रस्ट अध्यक्ष राजेंद्र खाबिया अपने अन्य पदाधिकारी को खरी-खोटी सुना रहे थे। उन्हीं ने अपने आपसी विवाद को इस तरफ मोड़कर जैन-सनातन समरसता तथा सद्भाव को बिगड़ने का कार्य किया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए वीडियो की भाषा से भी यह प्रमाणित होता है।

पूर्व में भी हो चुका है विवाद... यह वीडियो देखें

1997 में दायर हुआ था सिविल वाद

धर्मसभा अध्यक्ष अध्यक्ष ने बताया कि पहले किसी भी प्रकार का कोई विवाद नहीं था। इसकी शुरुआत 1954 में उस समज हुई जब यहां स्थित शिवलिंग को बाहर निकाल दिया गया था। मंदिर शासन का है। मंदिर के स्वामित्व का मामला हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। अध्यक्ष ने बताया कि द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायालय रतलाम में सिविल वाद क्रमांक 2-ए/1997 दायर हुआ था। वाद श्री ऋषभदेव केशरीमल जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक देवसुर तपोगच्छ श्री संघ माणक चौक रतलाम की ओर से अध्यक्ष शांतिलाल पिता चम्पालाल एवं सचिव शांतिलाल पिता रामलाल मेहता द्वारा दायर किया गया था। इसमें मध्यप्रदेश शासन (कलेक्टर रतलाम), गृह सचिव मप्र शासन मंत्रालय भोपाल, तहसीलदार रतलाम, माफी ऑफिसर द्वारा राजस्व आयुक्त कार्यालय कोठी उज्जैन मप्र को प्रतिवादी बनाया था।

न्यायालय ने अपने आदेश में यह किया था स्पष्ट

उक्त वाद के संबंध में 24 जुलाई 2007 को तत्कालीन द्वितीय अपर जिला न्यायाधीश राजीव भटजीवाले ने फैसला दिया था जिसमें स्पष्ट किया था कि श्री शांतिनाथ जैन मंदिर जिसे अगरजी का मंदिर भी कहते हैं मूर्ति पूजक जैन समाज का जैन देवालय होना प्रमाणित नहीं है। जैन समाज प्रतिवादीगण से इस देवालय का आधिपत्य एवं नियंत्रण प्राप्त करने का भी अधिकारी नहीं होना पाया जाता है। अतः वादी का वाद सव्यय निरस्त किया जाता है। जैन समाज ने इस निर्णय को चुनौती दे रखी है। मामले में सनातन समाज भी इंटरविनर है। उच्च न्यायालय के निर्णय अनुसार दोनों धर्म के अनुयायी यहां अपने-अपने आराध्य देवी-देवता की पूजा-अर्चना करने लिए स्वतंत्र हैं।

महावीर सिर्फ जैन समाज की बपौती नहीं, सभी के पूजनीय

पदाधिकारियों ने कहा कि श्री ऋषभदेव जी हमारे शास्त्रों में तीर्थंकर हैं। हम बुद्ध को भी भगवान मानते हैं। नानक भी हमारें हैं। महावीर भगवान अकेले जैन समाज की बपौती नहीं है, सभी सनातनियों के लिए पूजनीय देव है। हर धर्म का आदर करना सनातनियों का मूल उद्देश्य है। आज समय हिंदू धर्म को बचाने का है। यह तभी हो सकता है जब सनातन धर्म बचेगा। आपस में द्वेष भावना रखेंगे तो हिंदू धर्म की रक्षा कैसे होगी। सद्भावना नहीं बिगड़े इसी उद्देश्य से सनातन समाज धार्मिक आस्थाओं को पहुंच रही ठेस के बावजूद संयम बरत रहा है। अतः आपसी मनमुटाव दूर कर अपनी राजनीतिक महात्वाकांक्षा धर्म के बीच में नहीं लाएं। पदाधिकारियों ने कहा कि यदि मामले को अनावश्यक तूल दिया जाता है तो सनातन समाज भी न्यायालयीन प्रक्रिया में ऊपर (सुप्रीम कोर्ट) तक जाने से पीछे नहीं हटेगा।

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ये रहे उपस्थित

पत्रकार वार्ता में स्वामी 1008 श्री देवस्वरूपानन्द जी, श्री सुजानन्द जी महाराज, पं. संजय शिवशंकर दवे, श्री सनातन धर्मसभा एवं श्री महारूद्र यज्ञ समिति उपाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र शर्मा, महामंत्री नवनीत सोनी, वरिष्ठ सदस्य रमेश व्यास, अधिवक्ता बालूलाल त्रिपाठी, पं. हरीश चतुर्वेदी पं. संजय ओझा, राजेश दवे, पं. रामचंद्र शर्मा, बंसीलाल शर्मा, बृजेन्द्र मेहता, कैलाश झालानी, जनक नागल, जुगल पंड्या, नीलेश सोनी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।