जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री अवधेशानंद गिरीजी ने श्री बरबड़ हनुमानजी के दर्शन कर की गौसेवा

जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री अवधेशानंद गिरीजी ने बरबड़ हनुमान के दर्शन कर की गौसेवा। इस दौरान उनका प्रबुद्ध वर्ग ने स्वागत किया।

Sep 22, 2022 - 20:20
Sep 23, 2022 - 11:44
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जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री अवधेशानंद गिरीजी ने श्री बरबड़ हनुमानजी के दर्शन कर की गौसेवा
श्री बरबड़ हुमान जी के दर्शन करते जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री अवधेशानंद गिरीजी।
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री अवधेशानंद गिरीजी महाराज गुरुवार सुबह बरबड़ हनुमान मंदिर में दर्शन करने पंहुचे। भगवान के दर्शन कर उन्होंने क्षेत्र में संचालित गौशाला में गौमाता को मिष्ठान खिलाया।

रतलाम प्रवास के दौरान स्वामीजी ने दयाल वाटिका में रतलाम एवं आसपास के कई अन्य स्थानों से आए गुरु भक्तों से भेंट की। रात्रि में वे प्रभु प्रेमी संघ द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल हुए। यहां भजन, संगीत एवं नृत्य की प्रस्तुतियां दी गईं। संचालन के. बी. व्यास ने किया।

ये रहे मौजूद

इस दौरान प्रभु प्रेमी संघ अध्यक्ष हरीश सुरोलिया, पूर्व अध्यक्ष कैलाश व्यास, प्रभु प्रेमी संघ के प्रमोद राघव,अनिल झालानी, मनोहर पोरवाल,के. बी. व्यास, रामेश्वर खंडेलवाल, नारायणलाल शर्मा, आर. आर. दुबे, राजाराम मोतियानी, वी. डी. नागर,वीरेंद्र जोशी, राजेश ओझा, संजीव पाठक, नवीन भट्ट, सुनील भट्ट, सरिता सुरोलिया, सीमा प्रभु, लल्लनसिंह ठाकुर, संजय सोनी, मुकेश सोनी, विपिन पोरवाल, अरुण त्रिपाठी सहित समन्वय परिवार के माधव काकानी, जितेंद्र वाघेला, शिवराम शर्मा, गोपाल काकानी आदि मोजूद रहे।
Niraj Kumar Shukla 1994 से अब तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। इस दौरान सांध्य दैनिक 'रतलाम दर्शन' और हिंदी दैनिक 'साभार दर्शन', 'चेतना', 'नवभारत' और 'दैनिक भास्कर' सहित विभिन्न समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में पूर्णकालिक संवाददाता, उप-संपादक और समाचार संपादक जैसे दायित्वों का निर्वहन किया। हिंदी ब्लॉगर और स्वतंत्र लेखन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहते हुए वर्तमान में समाचार पोर्टल www.acntimes.com के मुख्य संपादक के दायित्व में। वर्ष 2011 से अब तक मप्र सरकार से राज्य स्तरीय अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार। पत्रकारिता में आने से पूर्व और बाद के कुछ वर्षों तक अध्यापन भी किया।