सनातन धर्म के अपमान का मामला ! DP ज्वैलर्स की ‘करतूत’ की जांच कर 23 जनवरी को पेश करें प्रतिवेदन, निजी परिवाद पर न्यायालय ने पुलिस को दिया निर्देश
रतलाम के डीपी ज्वैलर्स के निदेशकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सनातन धर्म के अपमान को लेकर दायर निजी परिवाद में न्यायालय ने पुलिस को जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
संस्थान ने अपने व्यापारिक लाभ के लिए श्री राम चरित मानस की चौपाई से छेड़छाड़ का मामला सबसे पहले एसीएन टाइम्स ने उठाया था
एसीएन टाइम्स @ रतलाम । धन और सोने की चमक के गुरूर में चूर रतलाम के डीपी ज्वैलर्स (DP Jewelers Ratlam) कानूनी फेर में उलझ गया है। मामला सनातन धर्म के आराध्य भगवान श्री राम के चरित्र पर आधारित श्री राम चरित मानस की चौपाई से छेड़छाड़ का है। इसे लेकर न्यायालय में एक निजी वाद दायर किया गया है। न्यायालय ने याचिका स्वीकार करते हुए पुलिस को जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
डीपी ज्वैलर्स द्वारा सनातन धर्मावलम्बियों की भावनाओं को आहत करने का मामला सबसे पहले एसीएन टाइम्स ने प्रमुखता से उठाया था। इसे लेकर सनातन धर्मावलंबियों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। इतना ही नहीं सनातन धर्म से जुड़े लोगों ने इस आभूषण निर्माता और विक्रेता फर्म के संचालकों और अन्य जिम्मेदारों के समक्ष आपत्ति जताई थी और इसके लिए माफी मांगने के लिए भी कहा था। हालांकि, धन-वैभव के घमंड के चलते फर्म के जिम्मेदारों को अपने इस कृत्य पर जरा भी अफसोस नजर नहीं आया।
एसीएन टाइम्स ने सबसे पहले DP ज्वैलर्स की करतूत पर ध्यान आकर्षित किया था, पूरा मामला नीचे दी गई लिंक खोलें
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संस्थान का दुष्कृत्य जिसके लिए दायर हुआ परिवाद
एडवोकेट प्रदीप सक्सेना के अनुसार डीपी ज्वैलर्स ने दशहरे के दिन 03 अक्तूबर 2025 को प्रकाशित एक विज्ञापन में राम चरित मानस की प्रसिद्ध चौपाई का दुरुपयोग किया था। डीपी ज्वैलर्स के निदेशकों ने इस चौपाई की दूसरी पंक्ति को बदल कर अपने फायदे के लिए उपयोग किया था। चौपाई बिगाड़कर इसके विज्ञापनों के बड़े-बड़े होर्डिंग लगाए लगाए गए थे। यही विज्ञापन अखबारों में भी प्रकाशित करवाए गए थे। विज्ञापन में रामचरित मानस की चौपाई का इस तरह व्यवसायीकरण करने से सनातन धर्मावलम्बियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। यह कारनामा सोशल मीडिया पर भी काफी छाया रहा था।
इन धाराओं में है दंडनीय अपराध
एडवोकेट प्रदीप सक्सेना के अनुसार डीपी ज्वैलर्स के निदेशकों द्वारा अपने व्यावसायिक विज्ञापन में विमर्शित और विद्वेषपूर्ण कार्य, जो किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आशय से दुष्कृत्य किया है। किसी व्यक्ति या सनातन समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पंहुचाने के विमर्शित आशय से शब्द उच्चारित करना भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 299 एवं 302 के तहत दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध
एडवोकेट सक्सेना के अनुसार मालवीय द्वारा मामले की शिकायत माणक चौक पुलिस थाने पर की गई थी। उन्होंने संस्थान के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करवाने के लिए काफी प्रयास किया लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इससे व्यथित होकर मालवीय ने डीपी ज्वैलर्स के सभी निदेशकों के विरुद्ध जिला न्यायालय में निजी परिवाद प्रस्तुत किया। न्यायिक दण्डाधिकारी कनिष्ठ खण्ड वैशाली चौहान के न्यायालय में प्रस्तुत परिवाद पर न्यायालय ने पुलिस थाना माणक चौक को जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसके लिए 23 जनवरी 2026 की डेडलाइन दी गई है।
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