मप्र शासन ने किया साहित्य, कला व संस्कृति सम्मानों का ऐलान, 2021 के पुरस्कारों के लिए यहां से डाउनलोड करें आवेदन

मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग ने विभिन्न क्षेत्रों में दिए जाने वाले सम्मानों का ऐलान कर दिया है। 2021 के पुरस्कार व सम्मान के लिए आवेदन भी आमंत्रित किए गए हैं।

Nov 24, 2021 - 19:14
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मप्र शासन ने किया साहित्य, कला व संस्कृति सम्मानों का ऐलान, 2021 के पुरस्कारों के लिए यहां से डाउनलोड करें आवेदन

एसीएन टाइम्स @ भोपाल  । मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा दिए जाने वाले विभिन्न प्रतिष्ठित सम्मानों और पुरस्कारों का ऐलान कर दिया गया है। ये पुरस्कार वर्ष 2019 और 2020 के लिए दिए जाएंगे। राष्ट्रीय कबीर पुरस्कार के लिए क्रमशः डॉ. विनय राजाराम और मनोज श्रीवास्तव का चयन किया गया है। दोनों भोपाल के हैं। शासन ने 2021 के लिए दिए जाने वाले पुरस्कारों और सम्मानों के लिए भी आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

मप्र शासन के संस्कृति विभाग द्वारा हर साल अनुशंसित संस्थाओं, साहित्यकारों, लेखकों और कलाकारों को विभिन्न पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजता है। कोरोना काल के चलते दो साल से पुरस्कार नहीं दिए जा सके थे। विभाग ने दोनों वर्षों के लिए पुरस्कारों और स्मानों के लिए चयनित विभूतियों का चयन किया है। इन्हें पुरस्कार के रूप में एक लाख, सवा लाख, दो लाख और तीन लाख रुपए सम्मानित निधि और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए जाएंगे। पुरस्कारों में राष्ट्रीय कबीर सम्मान के अलावा कालिदास सम्मान, लता मंगेस्कर सम्मान, किशोर कुमार सम्मान, साहित्य सम्मान आदि शामिल हैं।

2021 के लिए दिए जाने वाले सम्मान व पुरस्कार के लिए आवेदन आमंत्रित

पुरस्कार और सम्मान के लिए दावेदारी करने हेतु फॉर्म नीचे दी गई फॉर्मेट से डाउनलोड करें

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Niraj Kumar Shukla 1994 से अब तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। इस दौरान सांध्य दैनिक 'रतलाम दर्शन' और हिंदी दैनिक 'साभार दर्शन', 'चेतना', 'नवभारत' और 'दैनिक भास्कर' सहित विभिन्न समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में पूर्णकालिक संवाददाता, उप-संपादक और समाचार संपादक जैसे दायित्वों का निर्वहन किया। हिंदी ब्लॉगर और स्वतंत्र लेखन के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहते हुए वर्तमान में समाचार पोर्टल www.acntimes.com के मुख्य संपादक के दायित्व में। वर्ष 2011 से अब तक मप्र सरकार से राज्य स्तरीय अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार। पत्रकारिता में आने से पूर्व और बाद के कुछ वर्षों तक अध्यापन भी किया।